NCERT की किताबों में हैं कई गलतियाँ..

हाल ही में इस प्रकार की कुछ खबरें aa रही हैं कि सरकार सीबीएसई से जुड़े सभी स्कुलों में NCERT की किताबों को अगले शैक्षिक वर्ष से लागू करने जा रही हैं. ऐसे में पेरेंट्स का अपने बच्चे की पढाई को लेकर चिंता केरन लाजमी हैं. सबसे बड़ा प्रश्न ये कि क्या वाकई NCERT की किताबों से हमारे बच्चें वी शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं जोकि आज के युग में आवश्यक हैं.

आज का युग से हमारा आशय इस बात से समझिये, पहले माता पिता चाहते थे कि बच्चे सरकारी नौकरी प०आ जाये लेकिन आज कल आईआईएम, स्टार्ट अप और सिलिकॉन वैली का क्रेज अधिक हैं. ऐसे में क्या केवल NCERT की पुस्तकें बच्चे को पढ़ना उचित हैं. डालते हैं इसी विषय के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर एक नज़र..

  • चंडीगढ़ के एक स्कूल में अध्यापक पद पर कार्यरत सिद्ध गोयल ने बायोलॉजी सेक्शन के केवल दो चैप्टर में 7 गलतियाँ ढूढ निकाली. साथ ही इस अध्यापक ने इस बात की और भी ध्यान दिलाया कि वर्ष 2009 में ये पुस्कें प्रिंट हुई थी, तब से अब तक दुनिया में कई बदलाव हो गये लेकिन NCERT की किताबें जस की तस हैं और उनकी गलतियाँ भी.
  • ISA (Independent School Association) की ओर से एजुकेशन सेक्रेटरी को कुछ गलतियों का ठीक  करने के लिए लिखा भी जा चूका हैं, लेकिन पिछले पांच वर्षों से लेकर आज तक ये बदलाव नहीं हो पायें हैं.
  • चंडीगढ़ के सेक्टर 32 के एक स्कूल के प्रिंसिपल ने NCERT की किताबें अपने स्कूल में लागू करने से मना ही कर दिया. उनका कहना है कि बेकार प्रिंटिंग क्वालिटी व इलस्ट्रेशन के साथ साथ अंग्रेजी भाषा का गलत प्रयोग व लगभग सभी चैप्टर में गलतियाँ होने के कारण वो ये पुस्तकें अपने स्कूल के बच्चों को पढने को नहीं दे सकते.
  • कक्षा 11 के मैथ्स, कक्षा 12 के इतिहास, कक्षा 11 के फिजिक्स, कक्षा 10 के मैथ्स इसके अलावा नसरत की किताबों के बहुत से सब्जेक्ट्स में मिस प्रिंट व कंटेंट की गलतियाँ आसानी से मिल जायेंगी.
  • हाल ही में NCERT ने भी बायोलॉजी की टेक्स्टबुक में 44 गलतियाँ होने की बात कोर्ट में मानी हैं. 11 और 12 वो कक्षा हैं जहाँ से स्टूडेंट अपने मेडिकल में प्रवेश लेने की सीढ़ी चढना शुरू करता हैं. अगर इसी पड़ाव पर गलत शिक्षा मिलेगी तो आगे की पढाई का क्या होगा?

बच्चों को अच्छी शिक्षा देने का काम भले ही स्कूल का व अध्यापको का हैं लेकिन महंगे और सस्ते के चक्कर में न पड़ कर अभिभावक बच्चों को सही पुस्तकें दिलवाने की मांग करें इतनी जिम्मेदारी तो उनकी भी बनती हैं.

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